Monday, November 28, 2011

बाप रे बाप इतनी बीमारियों की दुश्मन है ये लौकी!


केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बारे में एक एडवाइज़री जारी की है जिसके मुताबिक़, लौकी का जूस पीने से पहले इसे चख लें। अगर लौकी का जूस कड़वा लगे तो इसे न पिएं। लौकी के जूस के बारे में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने एक जांच की थी। इसके आधार पर यह जारी किया गया है। यह मुद्दा काफी गर्मा गया है। बाबा रामदेव ने कहा है कि स्वस्थ लौकी का जूस पीने में कोई परेशानी नहीं है।
हमारे देश मे कुछ सब्जियां लोग बड़े ही चाव से खाते और खिलाते हैं ,अर्थात खुद तो फायदे लेते ही हैं ,औरों के स्वास्थ्य का ध्यान भी रखते हैं। अगर आए कोई मेहमान आपके घर में, तो आप इसकी सब्जी बनाना न भूलें, बड़ा सरल नाम है ,लौकी। अंग्रेजी में बाटल गार्ड के नाम से प्रचलित इसके बारे में कहा जाता है, कि मनुष्य द्वारा सबसे पहले उगाई गयी सब्जी लौकी ही थी।
प्रोटीन,फाइबर ,मिनरल,कार्बोहाइड्रेट से भरपूर इसके औषधीय गुणों का बखान हम आपको सरलता से बतलाते हैं -
-इसे उबाल कर कम मसालों के साथ सब्जी बनाकर खाने पर यह मूत्रल (डायूरेटीक), तनावमुक्त करनेवाली (सेडेटिव) और पित्त को बाहर निकालनेवाली औषधि है।
-अगर इसका जूस निकालकर नींबू के रस में मिलाकर एक गिलास की मात्रा में सुबह सुबह पीने से यह प्राकृतिक एल्कलाएजर का काम करता है ,और कैसी भी पेशाब की जलन चंद पलों में ठीक हो जाती है। -अगर डायरिया के मरीज को केवल लौकी का जूस हल्के नमक और चीनी के साथ मिलकर पिला दिया जाय तो यह प्राकृतिक जीवन रक्षक घोल बन जाता है।
-लौकी के रस को सीसम के तेल के साथ मिलाकर तलवों पर हल्की मालिश सुखपूर्वक नींद लाती है। -लौकी का रस मिर्गी और अन्य तंत्रिका तंत्र से सम्बंधित बीमारियों में भी फायदेमंद है। -अगर आप एसिडीटी,पेट क़ी बीमारियों एवं अल्सर से हों परेशान, तो न घबराएं बस लौकी का रस है इसका समाधान। - केवल पर्याप्त मात्रा में लौकी क़ी सब्जी का सेवन पुराने से पुराने कब्ज को भी दूर कर देता है। तो ऐसी लौकी ,जिसके औषधीय प्रयोग के बाद भी संगीत प्रेमियों द्वारा वाद्ययंत्र के रूप में और साधुओं द्वारा कमंडल के रूप में किया जानेवाला प्रयोग ,इसकी महत्ता का एहसास दिलाते है। तो लौकी इस नाम क़ी सब्जी को इसके नाम से हल्का न समझें, इसके गुण बड़े भारी हैं ,लेकिन शरीर पर प्रभाव बड़ा ही हल्का और सुखदाई है।इसी आर्टिकल को पढ़ें के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें :http://religion.bhaskar.com/article/yoga-ayurveda-assumed-all-the-diseases-specific-drug-muleti-2513902.html

वैज्ञानिकों ने भी मान लिया मुलेठी है इन सारी बीमारियों की अचूक दवा

आयुर्वेद जिसके गुणों का बखान सदियों से करता आ रहा है ,अब वैज्ञानिक भी उसके गुणों के मुरीद हो चुकें हैं ,जानना चाहेंगे  आप उसका नाम ,जी हां मुलेठी है उसका नाम। अमेरिका स्थित युनिवर्सिटी आफ साउथ केलीफोर्निया के वैज्ञानिक उन्ही  बातों को दुहरा रहे हैं, जिसके गुणों को आयुर्वेदिक ग्रथों में कई बार विभिन्न रोगों के सन्दर्भ में बताया गया है। 

वैज्ञानिकों ने मुलेठी जिसे अंगरेजी में लीकोरिस के नाम से जाना जाता है,इसके एक्सट्रेक्ट की गोली बनाकर उन महिलाओं में प्रयोग कराया ,जिन्हें माहवारी बंद होने के आखिरी दिनों में सूर्ख चेहरे,रात में पसीना आना,नींद न आना जैसी समस्याओं से दो-चार होना पड़ रहा था। वैज्ञानिकों ने मुलेठी की  जड़ का प्रयोग इस शोध में किया है, वैज्ञानिकों का कहना है, स्रि यह महिलाओं की क्वालिटी ऑफ लाइफ को बेहतर करने की अचूक दवा है। 
यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ केलीफोर्निया के वैज्ञानिकों ने मुलेठी के एक्सट्रेक्ट जिसे 'लाईकोजन 'नाम दिया गया है ,इसे 51 महिलाओं में प्रयोग कराया,वैज्ञानिकों का ऐसा मानाना है ,कि मुलेठी में स्थित रसायन महिलाओं के हारमोन 'एस्ट्रोजन ' से मिलता जुलता है। इस शोध के परिणामों को अमेरीकन सोसाईटी फार रीप्रोडकटीव मेडीसीन के सालाना कांफ्रेंस में प्रस्तुत किया गया है। तो हों जाए तैयार, अब वो दिन दूर नहीं कि   जिस मुलेठी को आयुर्वेद में दमा,खांसी,हाईपरएसिडीटी,गले क़ी खरास ,अल्सर ,पेशाब में जलन आदि अनेकों बीमारियों को ठीक करने क़ी दवा कहा गया है, उसी की गोलीयां बाजार में महिलाओं के पोस्टमेनोपोजल लक्षणों को दूर करने के लिए आधुनिक गोलियों के रूप में मिलने लगें।इसी आर्टिकल को पढने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिओक करें :http://religion.bhaskar.com/article/yoga-ayurveda-assumed-all-the-diseases-specific-drug-muleti-2513902.html

शादीशुदा महिलाओं के लिए ये बात ध्यान रखना बहुत जरूरी है क्योंकि

सेक्स जीवित प्राणियों की स्वाभाविक इच्छा का ही एक नाम है। हमारे समाज में इसे बड़ी ही गोपनीयता का रूप प्रदान किया गया है , जिस कारण जननांगों से सम्बंधित कई भ्रांतियों से विवाहित युगल भी जूझते हैं। कई बार शारीरिक रूप से स्वस्थ होने के बाद भी युगल  यौन संबंधों के प्रति उदासीन रहते हैं। जननांगों में यौन उत्कर्ष के दौरान स्वाभाविक रूप से रक्त का स्राव तीव्र हो जाता है ,तथा चरमोत्कर्ष (ओर्गाज्म ) के दौरान यह अपनी पूर्णता पर होता है। ईश्वर ने मानव शरीर को कुछ ऐसे हिस्सों से युक्त किया है, जिसकी  चरमोत्कर्ष (ओर्गाज्म) की ओर ले जाने में महती भूमिका होती है, ऐसा ही एक स्पोट जो महिलाओं की योनि में पाया जाता है नाम है - जी-स्पोट -। योनि क़ी दिवाल के सामने वाले हिस्से में मटर के दाने के समान इस स्पोट को महिलाओं में चरमोत्कर्ष का एक विन्दु माना गया है।
आस्ट्रेलिया के मेलबोर्न स्थित अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त यूरोलोजिस्ट डॉ. हेलेन .ओ. कोंनेल  ने इस पर गहन अध्ययन किया है, उनका  कहना है , कि महिलाओं के योनि की आंतरिक दिवार ही वेजाइनल-ओर्गास्म को पैदा करती है, यह योनि के  किसी खास हिस्से में अधिक हो सकता है, जिसे 'जी स्पोटÓ  नाम दिया जाता है।
सेक्सोलोजिस्ट डॉ पेट्रा बोयनटन का कहना है ,कि अक्सर महिलाएं इस जी-स्पोट के बारे में चिंतित रहती हैं और यदि उन्हें यह इसका एहसास खुद में नहीं  हुआ , तो  स्वयं  को यौन शिथिल मानने लग जाती हैं, जबकि ऐसा नहीं है,  डॉ पेट्रा बोयनटन का कहना है : यह जरूरी  नहीं, कि हर महिला में यह योनि के किसी खास हिस्से में ही हो ,यह अलग-अलग महिला में योनि की दिवार के अलग हिस्से में हो सकता है, अगर महिला केवल अपना ध्यान जी-स्पोट पर ही केन्द्रित करने लग जाती है ,तो वह सेक्स के अन्य पहलूओं पर ध्यान ही नहीं दे पाती है ,अत: यह आवश्यक है, कि यौन सम्बन्ध बनाते समय सम्पूर्णता की और ध्यान केन्द्रित किया जाए न की  किसी स्पोट विशेष  पर। इसी आर्टिकल को पढ़ें के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें :http://religion.bhaskar.com/article/yoga-married-women-it-is-very-important-to-keep-in-mind-2527006.html

दर्द से परेशान हैं तो पैन किलर नहीं टमाटर खाइए क्योंकि...

यूं तो हर फल एवं सब्जियों में कुछ न कुछ औषधीय गुण विद्यमान होते हैं ,लेकिन वैज्ञानिकों की माने तो, अब टमाटर दर्द निवारक दवा एस्पिरीन का विकल्प हो सकता है। एस्पिरिन को दर्द निवारक के साथ-साथ खून पतला करने वाली दवा के रूप में जाना जाता है,अब ऐसे ही कुछ गुणों को टमाटर में भी देखा गया है। 
टमाटर के बीजों से बनाये गए प्राकृतिक जेल शरीर में खून के प्रवाह को बढाने वाले तथा रक्त के थक्कों के बनने से रोकने वाले  पाए  गए  हैं ,यह बात हम नहीं, रोवेट  संस्थान के प्रोफे सर असीम दत्त रॉय के शोध के परिणाम कह रहे हैं। यूरोपीयन यूनियन के स्वास्थ्य अधिकारी तो पहले ही इस बात को मान चुके हैं, यह बात उन करोड़ों लोगों के लिए एक सुखद एहसास है ,जो अपने खून को पतला रखने के लिए एस्पिरिन का सेवन कर अल्सर जैसे दुष्प्रभाव को झेलने को मजबूर  हैं। 
प्रो असीम दत्त रॉय के अनुसार आज तक इस जेल के  कोई भी साईड इफेक्ट नहीं देखे गए हैं ,इस अध्ययन के अनुसार टमाटर के बीजों से बने  जेल के  सेवन के तीन घंटे के अन्दर ही यह रक्त के प्रवाह  को बढ़ा देता है ,तथा इसका अपना प्रभाव 18 घंटे तक बना रहता है, तो है न कमाल पिएं। टमाटर का सूप या टमाटर के बीजों का जेल और कर लें खुद को एस्पिरिन लेने की टेंशन से फ्री।इसी आर्टिकल को पढ़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें :http://religion.bhaskar.com/article/yoga-ayurveda-do-not-eat-tomatoes-because-of-the-pain-so-upset-2527400.html

साबित हो चुका है कि कमर दर्द दूर करने का ये है रामबाण उपाय

यूं तो शारीरिक सक्रियता को सबसे अच्छी चिकित्सा माना गया है, और योग तो इस मामले में एक कदम आगे है। आसनों के अभ्यास से सक्रियता के अलावा कुछ विशेष परेशानियों में  भी लाभ देखा गया है, ऐसी ही एक परेशानी है, कमर का  दर्द, जिससे आम तौर पर हमें परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इसे आधुनिक भाषा में लोबैकपेन या लम्बेगो कहते हैं अभी हाल में ही अमेरिका के सिएटल के ग्रुप रिसर्च इंस्टीच्युट के शोधकर्ताओं के अध्ययन ,जिसे आर्चिव आफ इन्टरनल मेडीसिन में प्रकाशित किया गया है, के अनुसार योग-अभ्यास का प्रभाव कमर के दर्द से निजात दिलाने में अब प्रमाणित हो गया है ,और यह भी सिद्ध हो गया है, कि आसनों का सीधा सम्बन्ध दर्द को दूर करने से है। पिछले अध्ययनों के अनुसार आसनों एवं ब्रीदिंग-एक्सरसाइज मानसिक तनाव  को मुक्त कर दर्द को कुछ हद तक कम करने में सफल होते  हैं,  इसे  इस नई शोध के परिणाम ने पूरी  तरह से बदल दिया है।
इस शोध के अनुसार योग अभ्यास से कमर दर्द में सीधे  लाभ मिलता है, जो केवल मानसिक थकान कम करने से ही सम्बंधित नहीं है।इस अध्ययन में 228 कमर दर्द से पीडि़त रोगियों का चयन किया गया,जिनमें किसी न किसी रूप में स्पाइनल डिस्क से सम्बंधित समस्या थी, इन्हें तीन अलग-अलग समूहों में बांटकर दो प्रकार  की कक्षाओं में सम्मिलित किया गया , एक कक्षा में रोगियों  को स्वयं सेल्फकेयर द्वारा किताबों से पढ़कर कुछ कमर दर्द से निजात पाने क़ी एक्सरसाइज का अभ्यास कराया गया ,तथा दूसरे समूह को औपचारिक रूप से कमर दर्द में लाभकारी योग के आसनों का अभ्यास कराया गया। 
सेल्फकेयर समूह में लाभ का प्रतिशत 20  था ,जबकि औपचारिक रूप से योग आसनों के अभ्यास करने वाले समूह में यह प्रतिशत कहीं अधिक 80 था। ऐसा देखा गया ,कि सेल्फ केयर  समूह क़ी अपेक्षा योग कक्षा में शामिल  दुगने कमर दर्द से पीडि़त रोगियों ने अपनी दर्द की गोलियों को लेना छोड़ दिया।इसी आर्टिकल को पढ़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें :http://religion.bhaskar.com/article/yoga-be-paid-to-the-specific-measures-to-remove-2528481.html

कोलेस्ट्रोल और चर्बी का दुश्मन है ये फल


आपने हमारे ऋषि-मुनियों को कन्द,मूल और फल खाकर अपनी आयु को हजारों साल तक जीने की कहानी सुनी और पढी होगी,आपको लगता होगा कि ,यह एक कपोल कल्पित कल्पना मात्र होगी,भला कोई इतनी लम्बी आयु कैसे जी सकता होगा। लेकिन यह सत्य है, कि शुद्ध पर्यावरण एवं शांतिमय वातावरण तथा सयंमित आहार-विहार एवं व्यवहार आपको आज भी लम्बी आयु प्रदान कर सकता है।
शुद्ध पर्यावरण एवं शांतिमय वातावरण की कल्पना आज के परिपेक्ष में बेमानी है, इसके लिए निरंतर सतत प्रयास की आवश्यकता है, लेकिन हाँ ,यदि बिना रासायनिक तत्वों के प्रयोग के प्राप्त फलों का प्रयोग स्वास्थ्य के लिए कितना लाभकारी हो सकता है, यह बात तरबूज के सम्बन्ध में खरी उतरती है।
केंट्युक़ी  विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के परिणामों को अगर देखा जाय तो तरबूज का रस, वजन कम करने के साथ-साथ,शरीर की अतिरिक्त चर्बी को भी कम करता है। इसके लगातार प्रयोग से कोलेस्ट्रोल एवं लो- डेंसिटीलिपोप्रोटीन का स्तर कम होने लगता है, तथा हार्ट की धमनियों की कठिनता के कारण होने वाला अवरोध जिसे - एथेरोस्केलोरोसिस- कहा जाता है  भी कम  हो जाता है। भारतीय मूल के वैज्ञानिक डॉ .शीबू साह का कहना है :तरबूज के रस के कई स्वास्थ्यवर्धक लाभ प्रायोगिक स्तर पर चूहों में देखे गए हैं, बस अब इसके बायोएक्टिव कम्पाउंड  को मानवीय फायदे के लिए निकालकर प्रयोग कराने की आवश्यकता है।इसी आर्टिकल को पढ़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें :http://religion.bhaskar.com/article/yoga-ayurveda-cholesterol-and-fat-is-the-enemy-of-the-fruit-2532272.html
 

इस एक फंडे से पाइए जोड़ो व घुटनों के दर्द से छुटकारा हमेशा के लिए

यदि आप जोड़ों के दर्द आस्टीयो-आर्थराईटीस से हैं, परेशान तो न घबराएं विशेषज्ञों की मानें तो आहार में कुछ परिवर्तन के साथ नियमित व्यायाम इस प्रकार के जोड़ों के दर्द को 50 प्रतिशत से अधिक कम कर सकता है। वेक फारेस्ट यूनिवर्सिटी के स्टीफन पी.मेसीयर  के एक शोध में यह जानकारी दी गयी है, जिसे हाल ही में अमेरिकन कालेज आफ रयूमेटोलोजी के सालाना वैज्ञानिक सत्र में प्रस्तुत किया गया है। 
आस्टीयो-आर्थराईटीस में सामन्यतया घुटनों की उपास्थि नष्ट हो जाती है ,तथा वजन में बढ़ोत्तरी ,उम्र एवं चोट ,जोड़ों में तनाव एवं पारिवारिक इतिहास आदि कारण इसे बढाने का काम करते हैं। ऐसे रोगियों में नियंत्रित आहार से वजन कम करना जोड़ों के दर्द को कम करने का कारगर उपाय है। यह अध्धयन 154 ओवरवेट  लोगों में किया गया, जिनमें आस्टीयो-आर्थराईटीस के कारण घुटनों का दर्द बना हुआ था, इस शोध में लोगों को रेंडमली चुना गया, तथा उन्हें केवल आहार नियंत्रण एवं आहार नियंत्रण के साथ नियमित व्यायाम कराया गया और इन समूहों को एक कंट्रोल समूह से तुलना कर अध्ययन किया गया। इस अध्ययन से यह बात सामने आयी, कि आस्टीयो-आर्थराईटीस से पीडि़त रोगियों में वजन कम करना घुटनों के दर्द से राहत पाने का एक अच्छा विकल्प है।इसी आर्टिकल को पढ़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें :http://religion.bhaskar.com/article/get-the-link-and-knees-to-relieve-the-pain-forever-2551644.html